नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के सामाजिक नेता सोनम वांगचुक ने अपनी 27 दिनों से चल रही भूख हड़ताल समाप्त कर दी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। वांगचुक ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया गया है, जिसके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने लद्दाख से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और तय समयसीमा में आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी एक मांग—स्थानीय प्रधान के इस्तीफे—को इस लिखित आश्वासन में शामिल नहीं किया गया है।
क्या थीं प्रमुख मांगें?
सोनम वांगचुक और उनके समर्थक लंबे समय से लद्दाख के विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने सरकार से क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने और विकास योजनाओं में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की थी।
वांगचुक के अनुसार, सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति दी है, लेकिन स्थानीय प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई आश्वासन नहीं दिया गया।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह सहमति बनी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने स्वयं वांगचुक से मुलाकात की और उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस दौरान दोनों पक्षों ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रतिबद्धता जताई।
वांगचुक का बयान
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा
आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि केंद्र सरकार अपने लिखित आश्वासनों को किस तरह और कितनी जल्दी लागू करती है। वहीं, स्थानीय प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी न होने के कारण इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।
Patnaites Update: लद्दाख से जुड़े इस घटनाक्रम को देशभर में महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक विकास के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और स्थानीय संगठनों की प्रतिक्रिया इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।




