पटना/गया: बिहार के गया जिले के चर्चित 'कैनाल मैन' लौंगी भुइयां की वर्षों पुरानी मेहनत और संघर्ष अब एक नए मुकाम पर पहुंचने जा रही है। 35 वर्षों तक अकेले अपने दम पर पहाड़ काटकर लगभग 5 किलोमीटर लंबी नहर बनाने वाले लौंगी भुइयां के जल संरक्षण के सपनों को अब CWS (Centre for World Solidarity) NGO का साथ मिलने जा रहा है।

लौंगी भुइयां ने बिना किसी सरकारी सहायता के केवल फावड़ा और कुदाल के सहारे कठिन पहाड़ी इलाके को काटकर नहर बनाई थी। उनका उद्देश्य अपने गांव और आसपास के खेतों तक पानी पहुंचाना था, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर न रहना पड़े। उनकी इस असाधारण मेहनत ने उन्हें पूरे देश में 'कैनाल मैन' के नाम से पहचान दिलाई।

अब CWS NGO ने इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। संस्था नहर के संरक्षण, विस्तार और जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों में सहयोग करेगी। इसके साथ ही ग्रामीणों को जल

संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ खेती के लिए भी जागरूक किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को बिहार के अन्य जल संकट वाले इलाकों में अपनाया जाए, तो हजारों किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सकती है। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, भूजल पर दबाव कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

लौंगी भुइयां की कहानी केवल एक व्यक्ति की मेहनत नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं। अब CWS NGO के सहयोग से उनकी यह प्रेरणादायक पहल और अधिक गांवों तक पहुंचेगी तथा बिहार में जल संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती है।

यह पहल न केवल जल संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनेगी।

 
 
 
भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण भी बनेगी।