इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम की बाढ़ स्थिति की समीक्षा की और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के साथ राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।
हालांकि ऊपरी असम के कुछ इलाकों में सड़क और संचार सेवाएं धीरे-धीरे बहाल होने लगी हैं, लेकिन निचले क्षेत्रों में अब भी जलभराव की समस्या बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जल प्रबंधन और नदी
विशेषज्ञों का कहना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जल प्रबंधन और नदी तट संरक्षण की चुनौती भी है। जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास और नदियों में बढ़ते कटाव के कारण बाढ़ की घटनाएं अधिक गंभीर होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राहत कार्यों से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि स्थायी बाढ़ प्रबंधन, तटबंधों की मजबूती और वैज्ञानिक जल संसाधन योजना पर दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत और पुनर्वास पर केंद्रित है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले कुछ दिन राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने, आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से तुरंत संपर्क करने की अपील की है।




