पटना। बिहार की राजधानी पटना को प्रदूषण और कचरे की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया गया है। पटना और उसके आसपास के इलाकों से निकलने वाले कूड़े का उपयोग अब बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। इस ऐतिहासिक 514 करोड़ रुपये की 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (Waste-to-Energy) परियोजना के लिए आधिकारिक तौर पर समझौता (MoU) हो गया है।

इस प्लांट के शुरू होने से न सिर्फ शहर की साफ-सफाई व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, बल्कि बिहार के ऊर्जा क्षेत्र को भी एक नया ग्रीन सोर्स मिलेगा।

परियोजना की मुख्य बातें

  • बिजली उत्पादन क्षमता: इस प्लांट से रोजाना 15 मेगावाट (MW) बिजली का उत्पादन किया जाएगा।

  • कचरे की खपत: परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 900 टन कचरे का निस्तारण (Disposal) किया जाएगा।

  • कुल लागत: इस पूरे प्रोजेक्ट पर 514 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

  • दायरा: पटना समेत कुल 12 नगर निकाय इस परियोजना से जुड़ेंगे, जहां का कचरा इस प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।

कैसे काम करेगी यह प्रणाली?

इस परियोजना के तहत पटना और आसपास के 12 नगर निकायों से हर दिन निकलने वाले सूखे और गीले कचरे को एकत्रित कर प्लांट तक लाया जाएगा। आधुनिक तकनीक (Modern Technology) का इस्तेमाल करके इस कचरे को प्रोसेस किया जाएगा और उससे पैदा होने वाली गर्मी (Heat) से टर्बाइन चलाकर 15 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी।

बड़ा फायदा: इस परियोजना से पटना को डंपिंग यार्ड

और लैंडफिल साइट्स (जैसे रामचक बैरिया) के पहाड़ों जैसे कचरे से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी। साथ ही, आस-पास के इलाकों में फैलने वाली बदबू और बीमारियों पर भी रोक लगेगी।

पर्यावरण और विकास को नई रफ्तार

यह परियोजना 'स्वच्छ भारत मिशन' और 'आत्मनिर्भर बिहार' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे एक तरफ जहां कचरा प्रबंधन (Waste Management) की समस्या का स्थायी समाधान होगा, वहीं दूसरी तरफ पैदा होने वाली ग्रीन एनर्जी से कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी।

समझौते के बाद अब इस प्लांट के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।