एक ओर जहां भारत अपने महत्वाकांक्षी एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के साथ ग्रीन एनर्जी की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है वहीं दूसरी तरफ भारत को दूसरे देशों में रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनीयों के E20 पेट्रोल सप्लाई करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पड़ोसी देश भूटान ने कहा है कि उसके पास एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी फ्यूल स्टोरेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, भूटान के अधिकारियों के मुताबिक समस्या क्लीन फ्यूल का विरोध करना नहीं है बल्कि फ्यूल को सुरक्षित तरीके से स्टोर करना अभी बड़ी चुनौती है। भूटान के ज्यादातर फ्यूल स्टोरेज पहाड़ी इलाकों में स्थित है जहां पर नमी को कंट्रोल करना मुश्किल है। यह तो हो गई देश के बाहर की समस्या लेकिन भारत में e20 फ्यूल का इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों का कहना है कि इसके इस्तेमाल से उनकी गाड़ियां लगातार खराब हो रही है गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है दरअसल bs6 फेज 2 और उसके बाद लांच हुई गाड़ियां ही केवल e20 फ्यूल के उपयोग के लिए होती है इसके अलावा 2020 से पहले की गाड़ियों में e20 फ्यूल के उपयोग से लगातार खराबी आ रही है। फ्यूल के अलावा भारत को चावल के व्यापार में भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है दरअसल भारत के चावल निर्यातकों को चीन ने बड़ा झटका दिया है चीन का कहना है कि भारत के चावल वाले शिपमेंट में जेनेटिकली मोडिफाइड के अंश पाए

गए हैं। चीन के इस कदम से भारत के चावल एक्सपोर्टर्स को नुक़सान हुआ है साथ ही चावल उगाने वाले किसानों की आमदनी को भी चोट पहुंची है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन को भेजे जाने वाले चावल दिल्ली रायपुर और जयपुर के थे।आपको बता दें कि चावल उत्पादन के मामले में भारत नंबर 1 है और चावल एक्सपोर्ट के मामले में भारत ग्लोबल मार्केट में धाक रखता है ऐसे में अगर चीन का मुद्दा नहीं सुलझाता है तो चीन की तरह दूसरे देश भी भारत को परेशान कर सकते हैं। ग़ौरतलब है कि लैब टेस्ट के बाद ही चावल दूसरे देशों को निर्यात किए जाते हैं उसके बाद भी चीन का इस तरह का रिएक्शन सिर्फ भारत के निर्यात को प्रभावित करना है। जैसा कि हम सब जानते हैं भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, हमारे देश में आमों की कई तरह की किस्में उगाई जाती है। भारतीय आमों के स्वाद की पूरी दुनिया मुरीद है। जिसमें जापान भी शामिल है लेकिन इस बार जापान भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख पाएगा। दरअसल जापान ने इस साल भारतीय आमों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि पेस्ट
है। भारतीय आमों के स्वाद की पूरी दुनिया मुरीद है। जिसमें जापान भी शामिल है लेकिन इस बार जापान भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख पाएगा। दरअसल जापान ने इस साल भारतीय आमों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल की प्रक्रिया में कमी दिखने पर यह कदम उठाया है। इससे पहले 1980 के दशक में भी जापान ने भारतीय आमों के आयात पर बैन लगाया था। यह एक ऐहतियाती बैन था। असल में जापान को डर था कि भारत में फल पर लगने वाले कीड़ों के साथ अंडे या लार्वा उनके यहां पहुंच जाएंगे जिससे जापान में खेती को नुक़सान हो सकता है। यह पूरा मामला तब सामने आया है जब भारत के आमों के व्यापार का सीजन पिक पर है। एक्सपोर्टर पहले से ही वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करते नजर आ रहे हैं समुद्री रास्तों में आई रुकावट की वजह से शिपिंग इंश्योरेंस चार्ज बढ़ गया है।इसकी वजह से जहाज कंपनियों की लागत बढ़ गई है। जिसका सीधा असर दूसरी चीजों के निर्यात पर भी पड़ सकता है।