बिहार में रेयर अर्थ एलिमेंट (दुर्लभ खनिज) का खनन होगा। इन खनिजों का इस्तेमाल परमाणु बम, रडार, ड्रोन और अंतरिक्ष तकनीक जैसे सामरिक क्षेत्रों में किया जाएगा। इस बड़े कदम से बिहार सरकार के खजाने में करीब 3 हजार करोड़ रुपए आने की उम्मीद है।यह राजस्व सिग्नेचर बोनस, रॉयल्टी और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड के जरिए प्राप्त होगा। इस परियोजना से बिहार में सीधे तौर पर 40 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें मजदूरों के साथ-साथ इंजीनियरों और मेडिकल स्टाफ की भी जरूरत होगी। राज्य के करीब 300 उद्योगों को अब कच्चा माल दूसरे राज्यों से नहीं मंगाना पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई सस्ती होगी और बैटरी व लोहे का सामान सस्ता हो जाएगा। इससे बिहार में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का रास्ता भी साफ होगा। वर्तमान में दुनिया के कुल रेयर अर्थ एलिमेंट का 70% खनन अकेले चीन करता है। भारत की रक्षा और डिजिटल जरूरतों के लिए यह खनिज बेहद जरूरी है। बिहार में इनके मिलने से न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की स्थिति मजबूत होगी। इन खनिजों का उपयोग टीवी, डिजिटल कैमरा, फाइटर जेट और पनडुब्बी बनाने में भी होता है। सरकार को उम्मीद है कि खनन शुरू होने पर बिहार देश के खनिज मानचित्र पर बड़ी ताकत बनकर उभरेगा।रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगी ताकत बिहार में मिलने वाले लैंथेनम और सीरियम जैसे खनिज परमाणु ऊर्जा और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम के लिए अनिवार्य हैं। लड़ाकू विमानों के सेंसर्स और नाइट विजन उपकरणों में भी इनका उपयोग होता है।
इन 7 जिलों में मिला खनिजों का भंडार- गया -निकल, क्रोमियम, पैलेडियम व प्लैटिनम ग्रुप के तत्व। रोहतास : ग्लोकोनाइट व पाइराइट। बांका : तांबा, सीसा, कोबाल्ट और एल्युमिनियम। भागलपुर : लैंथेनम, सीरियम, टाइटेनियम व क्रोमाइट। नवादा : वैनेडियम व इल्मेनाइट। जमुई व जहानाबाद : मैग्रेटाइट और लौह अयस्क।




