नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा और अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। मार्च 2026 में युवाओं और 'जेन जी' (Gen Z) के भारी समर्थन और विरोध प्रदर्शनों की लहर पर सवार होकर सत्ता में आए प्रधानमंत्री बालेंद्र "बालेन" शाह को अब उसी युवा वर्ग के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है जिसने उन्हें चुना था।

हाल ही में सप्ताहांत पर राजधानी काठमांडू समेत नेपाल के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे उनके इस्तीफे की मांग की है।

विरोध की वजह: एक प्रशासनिक कार्रवाई और दुखद घटना

इस ताजा जन-आक्रोश की मुख्य वजह हाल ही में हुई एक दुखद घटना और सरकार की कुछ नीतियां हैं:

  • सख्त प्रशासनिक कार्रवाई: बालेन शाह की प्रशासन शैली को लेकर पिछले कुछ समय से आम जनता और खासकर रेहड़ी-पटरी वालों व गरीब तबके में असंतोष था। शहर को व्यवस्थित करने के नाम पर की गई कुछ सख्त कार्रवाइयों ने लोगों को नाराज कर दिया।

  • एक ड्राइवर की मौत: काठमांडू में एक राइड-शेयरिंग ड्राइवर और ट्रैफिक पुलिस के बीच पार्किंग जुर्माने को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद आत्मदाह जैसी दुखद घटना सामने आई। इस घटना ने युवाओं के गुस्से को पूरी तरह भड़का दिया। युवा प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह सरकार की "प्रशासनिक उदासीनता" और अमानवीय रवैये का नतीजा है।

  • कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी: विस्थापित परिवारों की मदद करने और विरोध दर्ज कराने पहुंचे कई छात्र कार्यकर्ताओं, पत्रकारों

और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े युवाओं पर पुलिसिया बल प्रयोग किया गया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया।

'जेन जी' के आक्रोश की विडंबना

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कुछ ही महीने पहले, नेपाल के युवा मतदाताओं ने पुराने राजनीतिक दलों और स्थापित नेताओं को नकारते हुए बालेन शाह और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का खुलकर समर्थन किया था। 36 वर्ष की उम्र में देश के शीर्ष पद पर पहुँचने वाले बालेन शाह को युवा एक 'एंटी-एस्टेब्लिशमेंट' (व्यवस्था विरोधी) नायक के रूप में देखते थे।

लेकिन आज, वही युवा वर्ग उन पर उसी दमनकारी और तानाशाही रवैये को अपनाने का आरोप लगा रहा है, जिसके खिलाफ उन्होंने कभी लड़ाई लड़ी थी।

संसद में भी घेराव: "काला चश्मा उतारकर जनता का सामना करें"

सड़कों पर मचे इस बवाल की गूंज नेपाल की संसद के भीतर भी सुनाई दी। कई विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर सरकार को आड़े हाथों लिया और प्रधानमंत्री के सिग्नेचर लुक (उनके काले चश्मे) पर तंज कसा।

विपक्षी नेताओं ने कहा:

"शाह को अपना 'काला चश्मा' उतारकर जनता का सामना करना चाहिए और उनकी वास्तविक समस्याओं को देखना चाहिए।"

सांसदों का कहना है कि प्रधानमंत्री धरातल की

सदन के भीतर सरकार को आड़े हाथों लिया और प्रधानमंत्री के सिग्नेचर लुक (उनके काले चश्मे) पर तंज कसा।

विपक्षी नेताओं ने कहा:

"शाह को अपना 'काला चश्मा' उतारकर जनता का सामना करना चाहिए और उनकी वास्तविक समस्याओं को देखना चाहिए।"

सांसदों का कहना है कि प्रधानमंत्री धरातल की हकीकत से पूरी तरह कट चुके हैं और उन्हें इस असंतोष की जिम्मेदारी लेनी होगी। सड़कों से लेकर संसद तक बढ़ते इस दबाव के बीच, प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं।