पिछले दिनों नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (से.नि.) पहुंचे। जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी में नवनिर्मित मास कम्युनिकेशन स्टूडियो और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का उद्घाटन किया।इस दौरान राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन अपने चिर-परिचित फौजी अंदाज में नजर आए। नालंदा पुलिस की ओर से दिए गए 'गार्ड ऑफ ऑनर' के दौरान उन्होंने कमांड (आदेश) देने के तरीके में जल्दबाजी को लेकर जवानों को टोका और एसपी को ड्रिल का सही पाठ पढ़ाया।गार्ड ऑफ ऑनर का नेतृत्व कर रहे जवान ने जब सलामी पूरी होने के बाद राज्यपाल से आदेश मांगा, तो उन्होंने उसे समझाते हुए कहा, "प्रैक्टिस करिए। कमांड बोलते समय बीच-बीच में वकफा यानी (ठहराव) दिया जाना चाहिए। आप एक बार रफ्तार पकड़ लेते हैं और बस उसी में चले जाते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए।" इसके बाद जवान ने दोबारा 'सम्मान गार्ड बगल शस्त्र... सलामी शस्त्र' का कमांड दिया।सलामी खत्म होने के बाद राज्यपाल ने वहां मौजूद नालंदा के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी को भी यही बात समझाई। राज्यपाल ने एसपी से कहा, "जैसे ही मैं यहां आता हूं, ये शुरू हो जाते हैं और रुकते ही नहीं हैं। कमांड के शब्दों के बीच उचित ठहराव होना चाहिए। कमांड ऐसे होना चाहिए— *'सम्मान... गार्ड... रुको। राष्ट्रीय... सलूट... सलामी... शस्त्र'*। इसे एक सांस में खट-खट-खट-खट करके खत्म नहीं करना है।"
राज्यपाल की इस नसीहत पर एसपी भारत सोनी ने स्वीकार किया कि जवानों की 'टाइमिंग' ठीक करने की जरूरत है। इस पर राज्यपाल ने एसपी को निर्देश दिया कि वे जवानों




