हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर से तनाव की खबर सामने आ रही है दरअसल पाकिस्तान में अफगानिस्तान के खोश्त, कुनार और पकतीका प्रांतों में एयर स्ट्राइक की। तालिबान के अनुसार इन हमलों में 13 आम नागरिक मारे गए जिनमें 11 बच्चे शामिल हैं। इधर पाकिस्तान में दावा किया है कि उसने एयर स्ट्राइक में 26 तहरिक- ए तालिबान पाकिस्तानी यानी की टीटीपी के आतंकियों को मारा है। हाल ही में हुई यह घटना दोनों देशों के बीच विवाद को और बढ़ा रहा है। ऐसे में सवारी उठ रहा है क्या तालिबान इस हमले का जवाब पाकिस्तान को देगा और अगर जवाब देगा तो तो किस तरह से देगा क्या अफगानिस्तान सदियों पुराने गोरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाएगा या इस बार अलग तरीके से अपना बदला लेगा। कुछ विशेषज्ञ इसमें दोनों देशों के बीच जंग छिड़ने की बातें भी कर रहे हैं। आपको बता दें कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दुश्मनी कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों की सीमा यानी डूरंड रेखा को लेकर हमेशा से विवाद रहा है। पाकिस्तानी आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में टीटीपी जैसे समूह छिप कर पाकिस्तान पर हमला करते रहते हैं। वर्तमान में टीटीपी पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। जब 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में वापस लौटा तो पाकिस्तान को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधरेंगे लेकिन इसके उलट टीटीपी की गतिविधियां पहले से ज्यादा बढ़ गई। वर्ष 2025 और 26 में कई बार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान

में एयर स्ट्राइक की। इसके बाद तालिबान ने भी इसका जवाब देते हुए फरवरी 2026 में पाकिस्तान पर हमला किया जिससे ओपन वॉर की स्थिति बन गई। जून 2026 की ताजा एयर स्ट्राइक ने न सिर्फ विवाद को बढ़ाया बल्कि दोनों देशों के पुराने जख्म भी ताजा कर दिए। इस बीच पाकिस्तान बयान दे रहा है कि उसने सिर्फ आतंकियों को निशाना बनाया है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में बयान को ना करते हुए पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि हमले में नागरिकों की मौत हो गई है। गौरतलब है कि तालिबान 20 साल तक अमेरिका और नाटो से लड़ चुका है और उसमें लड़ने के लिए तालिबान ने गोरिल्ला युद्ध रणनीति को अपनाया था। आपको बता दें कि गोरिल्ला युद्ध रणनीति में छोटे-छोटे हमले किए जाते हैं जिसमें आई डी ब्लास्ट, घात लगाकर हमला करना जैसी तकनीक शामिल है। तालिबान के पास जेट विमान और टैंक जैसी आधुनिक हथियारों की कमी है लेकिन पहाड़ी इलाकों, सुरंगों और लोकल सपोर्ट का फायदा है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति ज्यादा मजबूत है क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, एयर फोर्स और आधुनिक हथियार हैं लेकिन अगर अफगानिस्तान गोरिल्ला युद्ध लड़े तो पाकिस्तान के लिए यह काफी लंबा और
है लेकिन पहाड़ी इलाकों, सुरंगों और लोकल सपोर्ट का फायदा है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति ज्यादा मजबूत है क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, एयर फोर्स और आधुनिक हथियार हैं लेकिन अगर अफगानिस्तान गोरिल्ला युद्ध लड़े तो पाकिस्तान के लिए यह काफी लंबा और खर्चीला साबित हो सकता है क्योंकि अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति गोरिल्ला युद्ध के अनुकूल है। फिलहाल जंग की स्थिति नहीं है लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव बहुत ज्यादा है। दोनों तरफ से लगातार हमले जारी हैं। एयर स्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के कई जगहों पर हमले किए हैं। अगर अफगानिस्तान बड़े स्तर पर जवाब देता है तो स्थिति बिगड़ सकती है। पाकिस्तान अभी आर्थिक और राजनीतिक समस्या से जूझ रहा है, लंबा युद्ध पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है। इधर तालिबान को भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता और मदद चाहिए इसलिए इसलिए वह पूरी तरह से जंग में नहीं उतरेगा लेकिन घरेलू दवाब के कारण पाकिस्तान के हमले का जवाब देना पड़ेगा। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए चीन रूस और अमेरिका जैसे बड़े देश चिंतित हैं और चाहते हैं कि दोनों देश आपसी मतभेद को सुलझा लें। लेकिन अब तक इस पर कोई स्थाई समाधान नहीं निकला है ऐसे में अगर तालिबान टीटीपी पर अंकुश लगाता है तो शांति संभव है। पाकिस्तान को पूरी दुनिया में आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह के रुप में जानती है। लेकिन जब पाकिस्तान की खुद की सुरक्षा लड़खड़ाती है तो वह सारा दोष पड़ोसी देश अफगानिस्तान के सिर पर डाल देता है। पिछले साल सितंबर से आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के बहाने पाकिस्तानी वायु सेना ने सीमा पर हमले के जरिए बार-बार अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है, उग्रवादियों के ट्रेनिंग सेंटर को निशाना बनाने के बजाय पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के रिहायसी से इलाकों, स्कूलों और स्थानीय बुनियादी ढांचों को अपना निशाना बनाया है। पिछले 9 महीनो में पाकिस्तानी सैनिक हवाई के अंतर्गत 570 निर्दोष अफगान नागरिकों की जान गई है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प रहेगा की दोनों देश आपसी सहमति से कोई समाधान निकलते हैं या युद्ध का रास्ता चुनते हैं और इस युद्ध का भारत पर क्या असर होगा।