प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े बदलाव लाने और परीक्षा प्रणाली में सुधार करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई है। इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली इस टास्क फोर्स के सदस्य अलग-अळग क्षेत्रों से हैंरिपोर्ट्स के मुताबिक, सदस्यों के चयन को अंतिम रूप देने में बहुत सावधानी और सोच-विचार किया गया है। टास्क फोर्स सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेगी। इससे देश की परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने और पारदर्शिता, सुरक्षा और सटीकता जैसे कई अन्य पहलुओं में सुधार करमें में मदद मिलेगी।
टीम की सबसे बड़ी ताकत चार अहम क्षेत्रों, टेक्नोलॉजी, सिक्योरिटी, लॉजिस्टिक्स और एडमिनिस्ट्रेशन के एक्सपर्ट्स का इसमें शामिल होना है। वे अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके परीक्षा प्रणाली में बदलाव ला सकते हैं।
नंदन नीलेकणि टेक्नोलॉजी और डेटा सिक्योरिटी में सुधार ला सकते हैं। आधार और UPI जैसे पारदर्शी सिस्टम के अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए, वे परीक्षाओं के लिए एक एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म बना सकते हैं, जिसे हैक या इंटरसैप्ट करना नामुमकिन हो।
इससे परीक्षार्थियों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और AI-आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए फर्जी परीक्षार्थियों का पता लगाया जा सकेगा।
वी. कामाकोटी, डायरेक्टर, IIT मद्रास: कामाकोटी साइबर हमलों से कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) के सॉफ्टवेयर और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्टर को सुरक्षित करने में मदद कर सकते हैं। AI का इस्तेमाल करके सवालों का डायनामिक रैंडमाइजेशन किया जा सकता है, यानी हर कंप्यूटर के लिए सवालों का क्रम बदलना और अचानक बदलाव करना।इससे परीक्षा केंद्रों पर लोकल सर्वर को हैक करने या स्क्रीन शेयरिंग जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
एस. सोमनाथ, पूर्व चेयरमैन,




