बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को भारत में सीधे मीडिया से बातचीत की अनुमति दिए जाने पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। दरअसल बांग्लादेश सरकार ने कहा, "उस कार्यक्रम के ज़रिए शेख़ हसीना और उनके सहयोगियों ने बांग्लादेशी राज्य और देश के लोगों का मज़ाक उड़ाया है।इस वर्चुअल प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान शाकिब अल हसन के देखे जाने के बाद उनके घर पर बुधवार रात हमले का दावा किया जा रहा है।
बांग्लादेश अवामी लीग ने एक्स पर बयान जारी किया है, "बांग्लादेश के मशहूर क्रिकेट आइकन शाकिब अल हसन के आवास पर पेट्रोल बम से एक भयावह हमला हुआ।यह हमला उस प्रेस कॉन्फ़्रेंस के कुछ घंटों बाद हुआ जिसमें विश्व प्रसिद्ध स्टार क्रिकेटर ने सम्मानित पार्टी अध्यक्ष शेख़ हसीना के साथ हिस्सा लिया था।अवामी लीग के बयान में कहा गया है, "प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस से जुड़ी रिपोर्टें प्रकाशित कीं तो उनके ख़िलाफ़ न्यायपालिका का इस्तेमाल कर मुक़दमे दायर किए जाएंगे।अवामी लीग ने इस हमले को कथित लोकतंत्र निर्माण के नाम पर पार्टी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ जारी कथित जनसंहार अभियान का एक और उदाहरण बताया और फ़ासीवाद करार दिया है।बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है. वह पांच अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही भारत में हैं।
हालांकि, पिछले दो सालों में यह पहली बार है जब उन्होंने
इसके कुछ ही समय बाद रात करीब 11 बजे बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के फ़ेसबुक पेज पर एक बयान जारी किया गया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, "भारतीय धरती पर शेख़ हसीना का प्रेस कॉन्फ़्रेंस उस दिन हुआ जब बांग्लादेश की जनता जुलाई क्रांति की दूसरी वर्षगांठ मना रही है।यह बांग्लादेश की संप्रभुता पर हमला है और जुलाई क्रांति के शहीदों का अपमान है।
बयान में आगे कहा गया, "इस देश
बयान में आगे कहा गया, "इस देश की जनता ने जुलाई क्रांति की भावना को अपनाते हुए दृढ़ संकल्प लिया है कि हमारा राष्ट्र कभी भी फ़ासीवाद के उन अंधेरे दिनों में वापस नहीं जाएगा और बांग्लादेश कभी किसी का वफ़ादार या संरक्षित राज्य नहीं बनेगा।जनसंहार की दोषी (शेख़) हसीना और उनका माफ़िया गिरोह अब कभी बांग्लादेश की राजनीति में जगह नहीं पाएगा।बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, "बांग्लादेश संप्रभुता, समानता, पारस्परिक सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दख़ल न देने और राष्ट्रीय गरिमा के आधार पर भारत के साथ रचनात्मक, पारस्परिक रूप से लाभकारी और भविष्य की ओर देखने वाले संबंध बनाए रखना चाहता है।
बयान में शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भी निराशा ज़ाहिर की गई है।इसमें कहा गया है, "अफ़सोस की बात है कि बांग्लादेश और भारत के बीच 2013 में हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत दोषी अपराधी (शेख़) हसीना को वापस भेजने के लिए बांग्लादेश की ओर से बार-बार किए गए अनुरोधों पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
"इसके उलट, किसी भी बहाने से उन्हें सार्वजनिक रूप से मीडिया से बातचीत का अवसर देना इस देश के लोगों की भावनाओं को आहत करता है और बांग्लादेश और भारत के बीच मज़बूत द्विपक्षीय संबंधों के निर्माण के लिए बेहद नुक़सानदेह है।इससे पहले बीते मंगलवार को पत्रकारों ने भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर प्रतिक्रिया मांगी थी।
उनसे पूछा गया था कि बुधवार को शेख़ हसीना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर भारत का क्या रुख़ है, जिसको लेकर बांग्लादेश पहले ही चिंता जता चुका है।जवाब में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "उस कार्यक्रम का आयोजन एक निजी संस्था कर रही है।भारत सरकार का उससे कोई संबंध नहीं है।वहां व्यक्त किए गए किसी भी विचार या बयान का समर्थन भारत सरकार नहीं करती और हमारा उनसे कोई संबंध नहीं है।इससे एक दिन पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से भी इस बारे में बात की थी और भारत से सहयोग मांगा था।उन्होंने कहा था, "बांग्लादेश को उम्मीद है कि भारत यह सुनिश्चित करने में सहयोग करेगा कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना समेत प्रतिबंधित अवामी लीग से जुड़ा कोई भी व्यक्ति राजनीतिक बयान देने या बांग्लादेश के भीतर अस्थिरता पैदा करने वाली किसी गतिविधि के लिए भारत की धरती का इस्तेमाल नहीं करेगा। उनका कहना था, "मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में मौत की सज़ा पाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना दिल्ली से कोई राजनीतिक बयान न दें और न ही कोई राजनीतिक गतिविधि चलाएं।




