भारत को रक्षा और एयरओस्पेस तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अहम फैसला लिया गया है। डीआरडीओ ने पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बने नेत्र एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम का फाइनल क्लियरेंस का फाइनल सर्टिफिकेट वायु सेना को आधिकारिक रूप से दे दिया है। दरअसल कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में आयोजित एक भव्य और ऐतिहासिक समारोह की अध्यक्षता वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की और इस समारोह को संबोधित करते हुए वायु सेना के उप प्रमुख ने नेत्र सिस्टम की जमकर तारीख की इन्होंने देश सुरक्षा में इसके महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ऑपरेशन सिंदूर और बालक और स्ट्राइक के दौरान नेत्र सिस्टम ने अपनी उपयोगिता और विश्वसनीयता को पूरी तरह से साबित किया। यह भी कहा कि स्वदेसी तकनीक का सबसे बड़ा फायदा हमारी सेनाएं बदलते युद्ध परिदृश्यों के हिसाब से इसमें अपनी जरूरत के मुताबिक मॉडिफिकेशन कर सकती है, जो की विदेश से मंगवाए गए हथियारों में संभव नहीं होता। इस खास मौके पर वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर एस क्रिस्टोफर साथ ही केंद्र पर एयरबोर्न सिस्टम की निदेशक और उत्कृष्ट वैज्ञानिक पी संध्या और नेत्र एफ ओ सी के प्रमुख ए एस कुमारन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। DRDO के एरोनॉटिकस क्लस्टर की महानिदेशक और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉक्टर के राजलक्ष्मी मेनन ने नेत्र के शानदार सफर की पूरी कहानी बयां की। उन्होंने यह भी बताया कि स्वदेशी सिस्टम को तैयार करने में वैज्ञानिकों को

किन-किन तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कैसे सिस्टम इंजीनियरिंग की मदद से उड़ान प्रशिक्षनो को सफलतापूर्वक पूरा करके भारतीय वायु सेना को बेहद ही सक्षम सिस्टम सोपा गया है। वही डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर के महानिदेशक डॉक्टर बी के दास ने कहा कि वायु सेना, वैज्ञानिकों और उद्योगों के बीच का शानदार तालमेल ही इस सफलता की नींव है। उन्होंने नेत्र को विकसित भारत का संकल्प और आत्मनिर्भरता का जीता जागता सबूत बताया है। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना और देश के औद्योगिक सहभागिता पर बधाई देते हुए कहा है कि फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिलना केवल एक तकनीकी कामयाबी ही नहीं बल्कि यह भारत की हवाई निगरानी और कमांड एंड कंट्रोल क्षमताओं को मजबूत करने वाली एक बहुत बड़ी रणनीतिक प्रगति है। आपको बता दें कि नेत्र का फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस भारतीय सैन्य इतिहास के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा वर्ष 2017 में जब इसे इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिला था तब से लेकर अब तक इसने हर मोर्चे पर खुद को सर्व श्रेष्ठ साबित किया है। आसमान में उड़ते हुए सैकड़ो किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के मिसाइलों, ड्रोन्स और लड़ाकू विमानो की टोह लेने और
गेम चेंजर साबित होगा वर्ष 2017 में जब इसे इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिला था तब से लेकर अब तक इसने हर मोर्चे पर खुद को सर्व श्रेष्ठ साबित किया है। आसमान में उड़ते हुए सैकड़ो किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के मिसाइलों, ड्रोन्स और लड़ाकू विमानो की टोह लेने और भारतीय फाइटर जेट्स को गाइडेंस देने में यह सिस्टम माहिर है।