रूस हमेशा से भारत का सच्चा दोस्त रहा है, कहा जाता है कि जब भारत में कोई बच्चा पैदा होता है तब उसे बताया जाता है कि अगर भारत का कोई सच्चा मित्र है तो वह रूस है, और ऐसा ही रूस में पैदा हुए बच्चों को भारत के बारे में बताया जाता है। गौरतलब है कि जब भी भारत बड़ी मुसीबत में फंसा है तो रूस ने हर संभव मदद की है फिर चाहे बात 1971 की जंग की ही क्यों ना हो। आप सोच रहे होंगे कि आखिर हम आज मित्र राष्ट्र रूस की बात क्यों कर रहे हैं दरअसल इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत इस महीने रूस से 23.5लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात करने जा रहा है आपको बता दें कि इससे पहले मई 2023 में भारत ने रूस से 22 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया था। रूस से एक बार फिर रिकॉर्ड तेल आयात करने पर यह साबित हो गया है कि संकट के समय भारत केवल अपने दोस्त रूस पर ही भरोसा करता है। जून 2026 के पहले तीन हफ्तों में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 53.5% रही है। अमेरिका द्वारा लगाए गए पाबंदियों से बचने के लिए भारत को रूस से तेल आयात करने में भारी कटौती करनी पड़ी थी। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका द्वारा ही भारत पर रूस से तेल खरीदने पर पाबंदी लगाई गई थी लेकिन बाद में अमेरिका नहीं इस पाबंदी को खत्म कर दिया। इसकी शुरुआत 28
फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से हुई इसके बाद वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ क्योंकि ईरान ने दुश्मन देश के मालवाहक जहाजों लिए होरमुज र्स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया था। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से वैश्विक खपत के लिए लगभग एक चौथाई तेल और एक तिहाई एलपीजी गैस की आपूर्ति की जाती है। वित्त वर्ष 2024 25 में भारत 54% गैस का आयात और 45% तेल का आयात हॉर्मुज के रास्ते हुआ था। इस समुद्री मार्ग से भारत को तेल आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत भी शामिल है। अमेरिका ईरान युद्ध के समय इस रास्ते के बंद होने से भारत में तेल और प्राकृतिक गैस की आयात प्रभावित हुई थी भारतीय बाजारों में प्राकृतिक गैस और तेल की कीमतों में बाहरी वृद्धि भी देखी जा रही थी जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ा था। आपको बता दें कि भारत अपने 90 फीसद तेल की जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने विभिन्न देशों से करीब 161 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात किया था। और
देखी जा रही थी जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ा था। आपको बता दें कि भारत अपने 90 फीसद तेल की जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने विभिन्न देशों से करीब 161 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात किया था। और उसे समय रूस 56.9 अरब डॉलर के तेल निर्यात के साथ भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था हालांकि बाद में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद तेल आयात में गिरावट आई थी। पिछले वर्ष अगस्त में रस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत के ऊपर 25 फीसद अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। विश्लेषको का मानना है कि आने वाले समय में रूस का तेल भारत के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा भले ही अमेरिका इस पर पाबंदियां लगाए। आपको बता दें कि शांति समझौते के बाद अमेरिका ने 21 जून को ईरानी तेल की बिक्री को मंजूरी दे दी और तेहरान के साथ अंतिम शांति समझौते दिशा में बढ़ते हुए दशकों पुरानी पाबंदियों में ढील दे दी है, इसके बदले ईरान में हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने की प्रतिबद्धता जताई है, विशेषज्ञों के मुताबिक इस फैसले से वैश्विक बाजारों को थोड़ी राहत मिलेगी संभावना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद 2022 में अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए थे इसके बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल पर अधिक निर्भरता बढ़नी शुरू की थी रूस यूक्रेन युद्ध के कारण जब वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ीं तब भारत ने रूस से सस्ता और कच्चा तेल बड़ी मात्रा में खरीदना शुरू किया था। लेकिन अमेरिका की मनमानी और पाबंदियों की वजह से इस पर रोक लगा दी गई थी। खैर देखना दिलचस्प रहेगा की भारत रूस से तेल आयात करता रहेगा या अमेरिकी दबाव में आकर कुछ समय बाद इसे बंद कर देगा। इस मामले पर आपकी क्या राय है क्या भारत को मित्र राष्ट्र रूस से तेल आयात करते रहना चाहिए या अमेरिका की धमकियों से डर कर इसे छोड़ देना चाहिए कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं।