पटना: राजधानी पटना का ऐतिहासिक 'कांग्रेस मैदान' इन दिनों राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है। राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री शहरी समग्र विकास योजना' के तहत इस मैदान में पार्क निर्माण की पहल शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच मालिकाना हक को लेकर तीखी रार छिड़ गई है।
दोनों पक्षों के मुख्य दावे
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कांग्रेस का रुख: पार्टी का दावा है कि यह 3 एकड़ से अधिक की भूमि उनकी निजी संपत्ति है, जिसे 1936 में स्वतंत्रता सेनानी अनुग्रह नारायण सिंह ने कांग्रेस को दान किया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार विकास के बहाने मैदान पर अवैध कब्जा करना चाहती है। मामला अब कोर्ट में है।
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भाजपा का रुख: सत्ता पक्ष का तर्क है कि दान में दी गई जमीन किसी एक दल की बपौती नहीं, बल्कि जनता की धरोहर है। भाजपा नेताओं के अनुसार, चूंकि विकास कार्य सरकारी फंड से हो रहा है, इसलिए यह पूरी तरह सार्वजनिक संपत्ति (Public Property) है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
मुख्यमंत्री शहरी समग्र विकास योजना के तहत नगर निगम इस मैदान का कायाकल्प कर रहा है:
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आधुनिक पार्क: क्षेत्र में हरियाली, वॉक-वे और बच्चों के लिए खेलने की जगह बनाना।
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जलजमाव से मुक्ति: बारिश के दिनों में जलभराव रोकने के लिए अत्याधुनिक संप हाउस का निर्माण।
मौजूदा स्थिति: विकास बनाम मालिकाना हक की इस लड़ाई के कारण फिलहाल मैदान में निर्माण कार्य प्रभावित है। स्थानीय लोग जहां पार्क और




