भारत सरकार ने पासपोर्ट नियम 1980 में संशोधन करके पासपोर्ट शुल्क के ढांचे में बदलाव किया है इसके अंतर्गत 36 पृष्ठों वाले सामान्य नये पासपोर्ट के लिए आवेदन शुल्क 1500 से बढ़कर ₹2500 कर दिया है। आपको बता दें कि पासपोर्ट से जुड़ा यह नया नियम 1 जुलाई 2006 से लागू होगा विदेश मंत्रालय की ओर से गुरुवार को प्रकाशित 20 जून की अधिसूचना के अनुसार 36 पृष्ठों वाले सामान्य नए पासपोर्ट या पासपोर्ट दोबारा जारी करवाने के लिए तत्काल सेवा शुल्क₹5000 रखा गया है। गौरतलब है कि अभी इस श्रेणी में तत्काल सेवा के लिए शुल्क 3500 रुपए है। इसी तरह 60 पृष्ठों वाले सामान्य नये पासपोर्ट या पासपोर्ट को दोबारा जारी करने के लिए आवेदन शुल्क ₹2000 से बढ़ाकर ₹3500 कर दिया गया है और तत्काल सेवा के लिए नया शुल्क ₹6000 होगा जबकि पहले इसके लिए ₹4000 देना पड़ता था।14 वाँ पासपोर्ट दिवस मनाए जाने के अवसर पर विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सरकार पासपोर्ट सेवाओं को सुगम बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पिछले एक दशक में पासपोर्ट नेटवर्क 6 गुना तक बढ़ गया है। देशभर में अब तक 500 से अधिक पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं। वर्ष 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट तथा इससे संबंधित सेवाएं प्रदान की गई है, पर ये ध्यान रहे की पासपोर्ट केवल यात्रा का दस्तावेज है ना की नागरिकता का प्रमाण। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने यह भी बताया कि पासपोर्ट जारी करने में औसतन 6 दिन लगते हैं। इसके साथ ही पिछले वर्ष 10 पासपोर्ट केंद्र

खोले गए थे और इस वर्ष भी 10 केंद्र खोले जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि भारतीयों के लिए वीजा मुक्त प्रवेश वाले देशों की संख्या 27 हो गई है जबकि पहले यह संख्या केवल 16 थी। इसके अलावा दुनिया के अन्य 47 देश भारत को विजा ओं अराइवल की सुविधा प्रदान करते हैं और 66 देश भारतीयों को इलेक्ट्रॉनिक वीजा की सुविधा उपलब्ध करवाते हैं यह आवागमन समझौते ज्यादातर यूरोपीय देशों के साथ होते हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कुशल पारदर्शी और नागरिक केंद्रित पासपोर्ट सेवाओं की तारीफ की और लोगों को सेवाएं देने के लिए विदेश मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। जयशंकर ने पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया है, इन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन शासन के विजन को अपने से यह काम सफल हो पाया है। हालांकि पासपोर्ट को केवल यात्रा का दस्तावेज कहे जाने के कारण एक अलग ही विवाद खड़ा हो गया है, विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पासपोर्ट एक्ट 1967 और बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में इसमें कोई परिवर्तन नहीं आया है।वैसे नागरिकता के सटीक दस्तावेज पर
कहे जाने के कारण एक अलग ही विवाद खड़ा हो गया है, विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पासपोर्ट एक्ट 1967 और बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में इसमें कोई परिवर्तन नहीं आया है।वैसे नागरिकता के सटीक दस्तावेज पर छीड़ी बहस ने ढ़ाई दशक पुराने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस यानी n r c की जरूरत पर एक बार फिर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है, हालांकि पुलिस सत्यापन के बाद बनने वाले पासपोर्ट को अभी तक नागरिकता का सटीक प्रमाण माना जाता था लेकिन कानून में ऐसा कहीं भी लिखित नहीं है आपको बता दें कि 1967 के पासपोर्ट एक्ट धारा 20 में लिखा गया है कि जरूरत पड़ने पर पासपोर्ट विदेशी नागरिकों के लिए भी जारी किया जा सकता है, एक अधिकारी ने बताया कि सात दशकों से भारत में रह रहे निर्वासित तिब्बतियों के लिए भी पासपोर्ट जारी करने का प्रावधान है पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव का कहना है कि समानता विदेश में पासपोर्ट धारक को उसे देश का नागरिक समझा जाता है जहां से वह पासपोर्ट जारी किया गया है लेकिन अगर कोई फ्रॉड होता है या फिर पेरेंट्ज की बात आती है तो नागरिकता कानून 1955 का आधार बनेगा ना कि कोई पासपोर्ट।