ईंधन की बढ़ी हुई कीमत और पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर बढ़ते आक्रोश के बीच उपभोक्ताओं से लेकर विपक्ष तक ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर जोर-शोर से उठाया है। अब इस पूरे अभियान को सड़कों पर लाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए ई-20 जनता पार्टी नाम के एक समूह ने मोर्चा संभाला है। इसके अलावा विपक्षी दल और कुछ और संगठनों की तरफ से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के संकेत दिए गए हैं। आपको बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन की सफलता के बाद ई20 पेट्रोल के खिलाफ भी आवाजें बुलंद हो रही हैं। इसी कड़ी में हाल ही में सीजेपी की ही तर्ज पर सोशल मीडिया पर एक और समूह की ओर से शुरू किया गया आंदोलन तेजी से जोर पकड़ रहा है। इस समूह ने अपना नाम ई20 जनता पार्टी (ईजेपी) दिया है और यह देश में ई20 पेट्रोल की अनिवार्यता खत्म करने और देश के परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कैसे पूरे देश में ई20 पेट्रोल मुद्दा बनता जा रहा है? किस-किस संगठन और समूह ने ई20 के खिलाफ आवाज उठाई है? इसमें सबसे ताजा तौर पर जुड़ी ई20 जनता पार्टी यानी ईजेपी क्या है? इन सबकी मांगें क्या हैं? पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट बीते वर्षों में कैसे मुद्दा बनता चला गया है? ई20 पेट्रोल को लेकर आंदोलन की बात क्यों हो रही है?
विपक्ष इसके लिए किस तरह तैयारी कर रहा है? सरकार का इस पर क्या रुख है? आइये जानते हैं।सरकार की ई20 यानी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की नीति के खिलाफ देशभर में विरोध के स्वर तेजी से बढ़े हैं। यह विरोध सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर अब सड़कों और अलग-अलग संगठनों के समर्थन तक पहुंच रहा है। गौरतलब है कि ई20 के मुद्दे पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की तरफ से शिकायतें आई हैं। कई वाहन विशेषज्ञों और कार-बाइक मालिकों का कहना है कि वे इथेनॉल मिश्रण के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि उपभोक्ताओं को ई20 के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए। वे पेट्रोल पंपों पर पारदर्शी लेबलिंग, माइलेज और इंजन पर ई20 के असर को लेकर स्वतंत्र अध्ययन, सरकारी डेटा के प्रकाशन और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।ई20 के खिलाफ मौजूदा समय में जो अभियान चल रहा है, उसे अब परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। दिल्ली टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोटर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने ई20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इन संगठनों का आरोप है
मौजूदा समय में जो अभियान चल रहा है, उसे अब परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। दिल्ली टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोटर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने ई20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक एक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। इन संगठनों का आरोप है कि ई20 ईंधन से विशेष रूप से पुराने वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) कम हो रही है, इंजन का प्रदर्शन गिर रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है। हाल ही में मुंबई के शिवाजी पार्क के बाहर शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे की ओर से सीजेपी की सफलता का जश्न मनाने के लिए एक विजय रैली आयोजित की गई थी, जिसमें हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया। इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ई20 वाहनों और लोगों की जेब दोनों को मार रहा है और नितिन गडकरी के इस्तीफे के नारे लगाए गए। दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ही तर्ज पर ई20 जनता पार्टी (ईजेपी) एक नया सोशल मीडिया और डिजिटल अभियान है। मौजूदा समय में यह केवल एक ऑनलाइन समूह है और इसका कोई आधिकारिक नेता या संरचित संगठन सामने नहीं आया है। सीजेपी की तरह ही, यह अभियान सोशल मीडिया, मीम्स, व्यंग्य और नारों, जैसे- 'जेन-जी की एक ही मांग, गडकरी का इस्तीफा' का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है।ईजेपी की सबसे बड़ी मांग यह है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-मिश्रित ईंधन (ई20) के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी दिया जाए। यह समूह इथेनॉल सम्मिश्रण नीति को पूरी तरह से खत्म करने, किसी सब्सिडी या मुफ्त ईंधन की मांग नहीं कर रहा। इनका तर्क है कि ई20 ईंधन से पुराने वाहनों के इंजन पर बुरा असर पड़ सकता है, उनकी माइलेज कम हो सकती है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है। इस अभियान ने बहुत कम समय में इंस्टाग्राम पर दो लाख से अधिक और एक्स पर लगभग 50,000 फॉलोअर्स जोड़ लिए हैं। इसके अलावा कई संगठनों ने भी इसका समर्थन किया है। वहीं आम आदमी पार्टी: केजरीवाल की पार्टी 1 अगस्त को दिल्ली में ई20 नीति के खिलाफ एक नेशनल टाउन हॉल आयोजित करने की योजना बना रही है। पार्टी ने वेबसाइट के जरिए एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इसके जरिए प्रधानमंत्री को ई20 नीति में बदलाव के लिए एक याचिका भेजे जाने की योजना है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मांग की है कि सरकार को पेट्रोल की कीमतें घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर कर देनी चाहिए। इतना ही नहीं आप की मुख्य मांग यह है कि सरकार को लोगों पर केवल एक प्रकार का ईंधन नहीं थोपना चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंपों पर पारंपरिक पेट्रोल, ई10 और ई20 में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का पूरा विकल्प दिया जाना चाहिए।