बिहार के बांकीपुर में उपचुनाव के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। ये सीट पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। बता दें कि बांकीपुर विधानसभा सीट वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का गढ़ रही है और यह सीट भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। आपको बता दें कि बांकीपुर सीट कई दशक से भाजपा का गढ़ रही है लेकिन इस उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के अध्यक्ष प्रशांत किशोर ने भी यहां से नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके चुनाव मैदान में आने से बांकीपुर का उपचुनाव दिलचस्प हो गया है। इस उपचुनाव और बांकीपुर विधानसभा सीट का पूरा समीकरण जानेंगे आप हमारे चैनल पटनाइट्स पर बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को वोटिंग कराई जाएगी। वहीं, वोटों की गिनती 3 अगस्त को होगी। भारतीय जनता पार्टी ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, अभिषेक कुमार ने बीते शुक्रवार को पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है। राजद ने इस सीट से एक बार फिर से रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। जनसुराज की ओर से प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में हैं। तो वहीं, तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।बांकीपुर क्षेत्र पहले पटना पश्चिम विधानसभा सीट के तहत आता था। साल 1995 में नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा
इस सीट से चुनाव जीते थे। इसके बाद साल 2005 तक वह यहां से चुनाव जीतते रहे। हालांकि, 2005 का चुनाव जीतने के बाद नवीन किशोर सिन्हा का निधन हो गया। इसके बाद साल 2006 में नितिन नबीन ने इस सीट पर उपचुनाव में जीत हासिल की। साल 2008 में परिसीमन के बाद ये सीट बांकीपुर कहलाने लगी। 2006 से लेकर अब तक नितिन नबीन ही इस सीट पर चुनाव जीतते रहे थे। अब उनके केंद्र में जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव होंगे।बांकीपुर विधानसभा सीट पर 3 लाख 79 हजार वोटर्स हैं। ये आम तौर पर कायस्थ प्रभाव वाली सीट मानी जाती है। बांकीपुर सीट पर करीब 4 लाख वोटर्स हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बांकीपुर में सबसे ज्यादा कायस्थ वोटर करीब 15 प्रतिशत हैं। इसके बाद यादव- 12 प्रतिशत, मुस्लिम- 10 प्रतिशत, चंद्रवंशी- 9 प्रतिशत, वैश्य- 9- प्रतिशत, दलित 8 प्रतिशत, भूमिहार- 7 प्रतिशत, ब्राह्मण- 7 प्रतिशत, राजपूत- 5 प्रतिशत, कुर्मी- 5 प्रतिशत और कुशवाहा- 3 प्रतिशत आते हैं। इस सीट पर कायस्थ वोटर्स निर्णायक माने जाते हैं जो कि पारंपरिक तौर पर भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान बांकीपुर विधानसभा सीट से नितिन नबीन ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव
5 प्रतिशत, कुर्मी- 5 प्रतिशत और कुशवाहा- 3 प्रतिशत आते हैं। इस सीट पर कायस्थ वोटर्स निर्णायक माने जाते हैं जो कि पारंपरिक तौर पर भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान बांकीपुर विधानसभा सीट से नितिन नबीन ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में उन्हें 98,299 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद की रेखा गुप्ता रही थीं जिन्हें 46,363 वोट मिले थे। चुनाव में तीसरे नंबर पर जनसुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी थीं जिन्हें 7,717 वोट मिले थे। बता दें कि बांकीपुर में बीते कुछ चुनाव से वोटिंग प्रतिशत काफी कम देखा गया है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में यहां करीब 41 फीसदी वोट डाले गए थे। 2020 में यहां करीब 36 फीसदी और 2015 में करीब 40 फीसदी वोटिंग हुई थी।खैर बांकीपुर उपचुनाव के बीच प्रशांत किशोर को बड़ा झटका लगा है। पिछले विधानसभा चुनाव में पटना की दीघा सीट से जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार बिट्टू सिंह और कुम्हरार सीट से उम्मीदवार गणित के प्रोफेसर केसी सिन्हा अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं। बिट्टू सिंह ने 8 जुलाई को ही जनसुराज पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।गौरतलब है कि बांकीपुर में विधानसभा का उपचुनाव है और जनसुराज से प्रशांत किशोर इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव से पहले जनसुराज के 2 बड़े नेताओं द्वारा प्रशांत किशोर का साथ छोड़ना और बीजेपी में शामिल होना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।प्रोफेसर केसी सिन्हा एक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें बिहार में गणित पढ़ने वाला बच्चा-बच्चा जानता है। केसी सिन्हा बिहार के घर-घर में गणित पढ़ने वाले बच्चों के लिए किताबों, एक्सरसाइज बुक या अन्य रूप से उपलब्ध रहे हैं। वह कई यूनिवर्सिटी में वीसी भी रहे हैं जिससे युवा वर्ग बीच उनकी अलग पहचान बनी हुई है।बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने गणित के प्रोफेसर केसी सिन्हा को कुम्हरार सीट से उम्मीदवार बनाया था।