राजगीर। बिहार में वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान और पशु चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राजगीर जू सफारी और बिहार वेटेरिनरी कॉलेज के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस करार का उद्देश्य वन्यजीवों से जुड़े अनुसंधान, प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूत करना है।
एमओयू के तहत राजगीर जू सफारी और बिहार वेटेरिनरी कॉलेज के बीच आपसी सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को वन्यजीवों के स्वास्थ्य, व्यवहार, संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, वन्यजीव चिकित्सा और संरक्षण के क्षेत्र में शोध कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
विश्व बाघ दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम
इस अवसर पर विश्व बाघ दिवस के मौके पर जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बाघों के संरक्षण, जैव विविधता और वन्यजीवों के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में करीब 480 बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों को बाघों के प्राकृतिक आवास, उनके संरक्षण की आवश्यकता और पर्यावरण संतुलन में वन्यजीवों की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनने और प्रकृति संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
शोध और प्रशिक्षण में बनेगा बेहतर समन्वय
राजगीर जू सफारी और बिहार वेटेरिनरी कॉलेज के बीच हुआ यह समझौता वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को जू सफारी में मौजूद
विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों के संरक्षण के लिए केवल उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी जरूरतों पर वैज्ञानिक शोध भी जरूरी है। ऐसे में शिक्षण संस्थान और वन्यजीव केंद्र के बीच सहयोग से इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
राजगीर जू सफारी पहले से ही पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। अब अनुसंधान और प्रशिक्षण से जुड़े इस सहयोग के जरिए इसे वन्यजीव शिक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।




