देश में एविएशन सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल करते हुए 11 नए फ्लाइंग स्कूल खोलने की योजना है ताकि पायलटों की कमी दूर की जा सके। भारत में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ा है लेकिन पायलटों की कमी चिंता का विषय है। इस स्थिति से निपटने के लिए देश में 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन शुरू किए जाएंगे। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फरवरी 2026 में शुरू किए गए ई-टेंडर के तहत सात एयरपोर्ट पर 11 नए FTO स्लॉट की टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अनुमान के मुताबिक अगले एक दशक में देश में करी 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी। वहीं अगले पांच साल में देश की एयरलाइंस कंपनियां अपने बेड़े में करीब 500 नए विमान जोड़ सकती हैं। साथ ही देश में करीब 50 नए एयरपोर्ट विकसित होने की संभावना है। एविएशन सेक्टर के बढ़ने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया अगले 18 महीनों में अपने फ्लीट में 50 से 60 नए हवाई जहाज शामिल करने की तैयारियों में जुटा हुआ है।भारत में पायलट लाइसेंस जारी होने की संख्या में भी लगातार वृद्धि देखी गई है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जारी किए जाने की संख्या 2018 में 640 से बढ़कर 2024 में 1,628 हो गई। हाल के वर्ष में DGCA ने विदेशी संस्थानों से प्रशिक्षण लेने वाले कैडेट्स को 615 CPL जारी किए, जबकि 2,309 स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) भी जारी किए गए। यह देश में

पायलट प्रशिक्षण के लिए बढ़ती रुचि और नामांकन को दर्शाता है।रीजनल एयरपोर्ट पर शुरू होने वाले नए FTO से पायलट बनने की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक सुलभ और किफायती ट्रेनिंग का विकल्प मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा। सरकार की यह पहल भारत के तेजी से विस्तार कर रहे एविएशन सेक्टर के लिए जरूरी कुशल मानव संसाधन तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है।