बिहार के बेगूसराय जिले के रहने वाले 96 वर्षीय आचार्य सीताराम साहू ने यह साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, जिस उम्र में अमूमन लोग आराम करना पसंद करते हैं या शारीरिक समस्याओं से परेशान रहते हैं उस उम्र में सीताराम साहू ने इग्नू से गीता शास्त्र विषय से एम ए की परीक्षा दी। इन्होंने 95 साल की उम्र में इस विषय में दाखिला लिया और अब 96 वर्ष की उम्र में परीक्षा दे रहे हैं। आचार्य सीताराम साहू का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ डिग्री लेना नहीं है बल्कि युवाओं को संदेश देना है कि अगर इंसान में किसी चीज को सीखने की ललक हो और जुनून हो तो आयु सीमा बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद् भागवत गीता और भारतीय संस्कृति के पुरातन महत्व से वह युवाओं जोड़ना चाहते हैं। आपको बता दें की स्वतंत्रता आंदोलन और संपूर्ण क्रांति में भाग ले चुके सीताराम साहू ज्ञान अर्जित करने के लिए पूरी तरह से आज भी समर्पित हैं। परीक्षा हॉल में उनका युवा पीढ़ी के बीच बैठकर परीक्षा देना यह संदेश देता है कि इंसान के अंदर का विद्यार्थी हमेशा जीवित रहता है जरूरत है तो बस सही दिशा देने की।
96 साल की उम्र में ली एम ए की डिग्री




