भारत में तकरीबन 300 दिनों तक सूर्य भरपूर रोशनी देता है। यह रोशनी ऊर्जा के रूप में इतनी उबलब्ध रहती है कि सौर पैनल ठीक से काम कर सकें। सोलर पैनल ऐसे होते हैं, जो सूर्य की एनर्जी को बिजली में बदलते हैं। हालांकि, रातों के समय या मानसून सीजन में सोलर पैनल बिजली नहीं बना पाते हैं। मगर, कुछ ऐसे भी तरीके हैं, जो रात को भी और मानसूनी बारिश के दौरान भी सोलर पैनल से बिजली पैदा कर पाते हैं। सौर ऊर्जा पैदा करने के मामले में भारत पूरी दुनिया में अग्रणी देशों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी जिन देशों का दौरा कर रहे हैं, वहां भारत क्लीन एनर्जी, ग्रीन एनर्जी और विंड एनर्जी को लेकर समझौते कर रहा है। मौजूदा ऑस्ट्रेलिया दौरे में भी पीएम मोदी ने सोलर एनर्जी पर जोर दिया है।बारिश में सोलर पैनल के काम करने के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल करना होता है। यह बैटरी स्टोरेज सिस्टम दिन में सोलर पैनल से पैदा की गई बिजली को स्टोर करके रख लेता है। यह रात में या मानूसन के दौरान बिजली रिलीज करता है।बैटरी स्टोरेज सिसटम में लीथियम ऑयन बैटरियों का इस्तेमाल होता है। यह इतनी बिजली स्टोर कर सकता है कि बारिश के दिनों में या रात को आपके घर या ऑफिस को कई घंटों तक के लिए बिजली दे सकता है।ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सौलर एनर्जी, ग्रीन एनर्जी और क्लीन एनर्जी को लेकर बात की है। एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने कहा-'हम भारत में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन के लिए मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रहे हैं। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट जीरो एमिशन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। हमने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता का लक्ष्य रखा है।बारिश या रात में बिजली पाने का दूसरा तरीका यह है कि हाइब्रिड सोलर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए। हाइब्रिड सोलर सिस्टम में सोलर पैनल के साथ-साथ एनर्जी पैदा करने वाले दूसरे सिस्टम भी होते हैं, जैसे कि विंड एनर्जी या हाइड्रो पावर। इससे लगातार बिजली मिलती रहती है।
हाइब्रिड सोलर सिस्टम वैसे तो परंपरागत सोलर सिस्टम से काफी महंगे पड़ते हैं, मगर ये कम धूप वाले समय में भी बिजली का एक भरोसेमंद स्रोत प्रदान कर सकते हैं।सोलर पैनल रात में या मॉनसून के दौरान काम नहीं करते क्योंकि उन्हें बिजली बनाने के लिए सूरज की रोशनी की ज़रूरत होती है। हालाँकि, बैटरी स्टोरेज सिस्टम या हाइब्रिड सोलर सिस्टम की मदद से इन समयों में भी बिजली बनाई जा सकती है। ये सिस्टम कम धूप वाले समय में भी बिजली का भरोसेमंद स्रोत बन सकते हैं।प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोलर
सूरज की रोशनी की ज़रूरत होती है। हालाँकि, बैटरी स्टोरेज सिस्टम या हाइब्रिड सोलर सिस्टम की मदद से इन समयों में भी बिजली बनाई जा सकती है। ये सिस्टम कम धूप वाले समय में भी बिजली का भरोसेमंद स्रोत बन सकते हैं।प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोलर एनर्जी प्रोडक्शन और कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता दोनों ही मामलों में भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया में तीसरे स्थान पर है। देश की कुल इंस्टॉल्ड सोलर क्षमता 150 गीगावाट(GW) से ज्यादा हो गई है, जिससे 1,08,494 GWh सोलर बिजली पैदा हो रही है। दुनिया में चीन और अमेरिका पहले और दूसरे स्थान पर हैं।मानसून का मौसम। मानसून के दौरान भारी बारिश और बादलों की वजह से पैनल तक पहुंचने वाली सूरज की रोशनी काफी कम हो सकती है, जिससे बिजली बनाने में काफी नुकसान होता है।यह नुकसान कई तरह से हो सकता है। पहला, भारी बारिश से पैनल पर जमा धूल और गंदगी धुल सकती है, जिससे उनकी क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा, हवा में नमी और उमस बढ़ने से पैनल पर भाप जम सकती है, जिससे सूरज की रोशनी सोखने की उनकी क्षमता और भी कम हो जाती है।मानसून के दौरान सोलर पैनल से बिजली बनाने में कमी आने का एक और बड़ा कारण है आसमान में ज़्यादा बादल छाए रहना। जब बहुत ज्यादा बादल होते हैं, तो पैनल तक पहुंचने वाली सूरज की रोशनी बिखर जाती है और फैल जाती है, जिससे उनसे बनने वाली ऊर्जा की मात्रा कम हो जाती है। इसके अलावा, बादल सूरज की रोशनी को वापस वायुमंडल में भेज सकते हैं, जिससे पैनल तक पहुंचने वाली रोशनी और भी कम हो जाती है।मानसून का मौसम सोलर पैनल को भी नुकसान पहुंचा सकता है। तेज हवाएं और ओलावृष्टि पैनल को तोड़ या उनमें दरार डाल सकती हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है या वे पूरी तरह से बेकार भी हो सकते हैं।इन नुकसानों को कम करने के लिए, कुछ सोलर पैनल बनाने और लगाने वाली कंपनियां खास तौर पर डिजाइन किए गए पैनल का इस्तेमाल करने लगी हैं जो नमी और धूल से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा, पैनल की नियमित सफाई और रखरखाव उन्हें अच्छी स्थिति में रखने और मानसून से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है।