पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बड़ा धमकी भरा बयान जारी किया है। एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल पर बातचीत के दौरान आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ने में जरा भी देर नहीं करेगा। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी प्रभाव में हस्तक्षेप कर रहा हैऔर रणनीतिक हथियार के तौर पर रस का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कर रहा है। बातचीत के दौरान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले 1 साल में सिंधु जल समझौते पर हुई घटनाक्रम कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। आपको बता दें कि 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि- जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवादियों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता तब तक यह जलसंधि बहाल नहीं की जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गहरे जल संकट से जूझ रहा है खासकर सिंदूर बलूचिस्तान प्रांत में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों को देखें तो नॉर्थ वेस्ट कैनल में 64.1% पानी की कमी है, वही राइस केनाल में 38% पानी की कमी दर्ज की गई है, दादू कनाल में कल 82% पानी की कमी है। पानी का लगातार अस्तर घटना से इसका सीधा असर कृषि और

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आपको बता दें कि सिंधु नदी प्रणाली में मुख्य रूप से 6 नदियां हैं यह नदियां हैं सिंधु,झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलुज। इन नदियों के किनारे का इलाका लगभग 11.2 लाख वर्ग किलो मीटर में फैला हुआ है, इसमें कुल 47 प्रतिशत जमीन पाकिस्तान और 39% जमीन भारत, 8 प्रतिशत जमीन चीन में और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के कुल 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। गौरतलब है कि 1947 के बंटवारे से पहले ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर झगड़ा शुरू हो गया था । 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच स्टैंडस्टिल समझौता हुआ इस समझौते के तहत पाकिस्तान को दो मुख्य नहरों से पानी मिलता रहा और यह समझौता 31 मार्च 1948 तक कायम रहा। 1 अप्रैल 1948 को इस समझौते के खत्म होने के बाद भारत में दोनों नहरों का पानी रोक दिया जिसका सीधा असर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के 17 लाख एकड़ कृषि भूमि पर पड़ी। खैर उसके बाद दोबारा समझौता हुआ और भारत पाकिस्तान को पानी देने के लिए तैयार हो गया। इसके
1948 को इस समझौते के खत्म होने के बाद भारत में दोनों नहरों का पानी रोक दिया जिसका सीधा असर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के 17 लाख एकड़ कृषि भूमि पर पड़ी। खैर उसके बाद दोबारा समझौता हुआ और भारत पाकिस्तान को पानी देने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद परसों 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए और इसे ही इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल समझौता कहा जाता है। पाकिस्तान के बड़े भूभाग को सिंचाई के लिए पूरी तरह से सिंधु नदी पर निर्भर रहना पड़ता है ऐसे में पाकिस्तान में रह रहे लोगों के उसके साथ-साथ वहां की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ ही आपको बता दें कि पाकिस्तान के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को पानी नहीं मिल पाने के कारण वहां की बिजली उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है। साफतौर पर यह देखा जा सकता है कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को रोकने के बजाय भारत को युद्ध की धमकी देकर अपने नागरिकों को गुमराह कर रहा है।