बिहार के झंडू कुमार जो बचपन में पोलियो का शिकार हुए, सब्जी बेची, ई-रिक्शा चलाया, अब CWG में भारत के लिए पदक जीता,झण्डू कुमार का जन्म बिहार के नालंदा जिले में स्थित हरनौत में हुआ था। इनकी उम्र 28 साल है।बताया जाता है कि झंडू कुमार का प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षों से भरा था एक समय पर उन्होंने गुजर-बसर करने के लिए ई रिक्शा चलाने से लेकर सब्जी बेचने तक का काम किया था।झंडू कुमार ने महज पांच साल की उम्र में ही अपने पैरों की मजबूती गंवा दी थी ।उन्हें पोलियो हो गया था।जिसके बाद उन्हें बैसाखी का सहारा लेना पड़ा। पोलियो की मार से वह उबर भी नहीं पाए थे कि गरीबी ने उन्हें अपनी चंगुल में फंसा लिया।परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने सब्जी बेचने का काम शुरू कर दिया मगर यहां से भी गुजारा नहीं चला तो उन्होंने कोरोना काल में ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। पर स्थिति जस की तस बनी रही नतीजन एक समय पर उन्हें अपना ई-रिक्शा भी बेचना पड़ा। उसके बाद पैरा पावरलिफ्टिंग में आने से पहले झंडू कुमार ने गोला फेंक, भाला फेंक और चक्का फेंक जैसे खेलों में भी हाथ आजमाया था।मगर यहां उन्हें कुछ खास कामयाबी हाथ नहीं लगी।जिसके बाद उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग पर फोकस किया।फिलहाल वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और देश के लिए मेडल भी लेकर आए हैं। बता दें कि इन्होंने साल 2017 में पैरा-एथलेटिक्स (शॉट पुट और डिस्कस थ्रो) से शुरुआत की थी। इसके बाद जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के दौरान उनकी

रुचि पावरलिफ्टिंग में बढ़ी। पैरालंपिक पदक विजेता राजेंद्र सिंह रहीलू ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें गांधीनगर स्थित एसएआई सेंटर में ट्रेनिंग दिलाई।2025 बीजिंग वर्ल्ड कप और 2026 एशियाई चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीते, और ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों मे 190 किग्रा वजन उठाकर देश के लिए ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीता।