Authorities are now expected to review safety protocols and investigate whether negligence or procedural lapses contributed to the accident.
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Trendingरांची — झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और धांधली के खिलाफ राजधानी रांची में युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। हज़ारों अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी है, जो अब झारखंड का 'जंतर-मंतर' बन चुका है। बापू वाटिका से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो और गिरिडीह जैसे विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों छात्रों के राज्यव्यापी जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद छात्र तिरंगा लहराते हुए अपनी मांगों को लेकर मैदान में डटे हुए हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच और अभ्यर्थी न्याय मंच के बैनर तले एकजुट हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा की रद्दगी: ओएमआर शीट और परिणाम में कथित विसंगतियों के चलते 14वीं JPSC पीटी परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए। CBI जांच की मांग: राज्य सीआईडी (CID) जांच पर अविश्वास जताते हुए छात्र पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग कर रहे हैं। परीक्षा प्रणाली में ढांचागत सुधार: भविष्य में धांधली रोकने के लिए OMR शीट पर 'Not Attempted' (अटेम्प्ट नहीं किया) का पांचवां विकल्प शामिल किया जाए और बाहरी सेवानिवृत्त जजों की स्वतंत्र देखरेख समिति बनाई जाए। "झारखंड के आसमान में मानसून के बादल तो छाए ही हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के काले बादलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को ढंक लिया है। जब तक ये बादल नहीं छंटते, हमारा सत्याग्रह जारी रहेगा।" — जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे एक आंदोलनकारी छात्र भूख हड़ताल और राजनीतिक सरगर्मी आंदोलन का चेहरा बने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो लगातार अनशन पर बैठे हैं, जिनके समर्थन में अन्य अभ्यर्थी भी भूख हड़ताल में शामिल हो गए हैं।छात्रों ने अपने आंदोलन को पूर्णतः गैर-राजनीतिक रखने के लिए एक आचार संहिता (Code of Conduct) तय की है, जिसके तहत मंच से किसी भी प्रकार की राजनीतिक या व्यक्तिगत बयानबाजी पर रोक है। इसके बावजूद, झारखंड की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रतिनिधिमंडल ने धरना स्थल पहुंचकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया है और आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दिया है।
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Trendingनई दिल्ली:कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) 2026 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी अर्चंधति चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी ऐतिहासिक जीत पर खुशी जाहिर करती नजर आ रही हैं। इंटरव्यू के दौरान अर्चंधति ने कहा कि यह पदक सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे देश, उनके परिवार, कोच और सपोर्ट स्टाफ की वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार मेहनत और आत्मविश्वास ने उन्हें सफलता दिलाई। अर्चंधति ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने देशवासियों से मिले प्यार और समर्थन के लिए भी आभार व्यक्त किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत ने कई स्पर्धाओं में पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अर्चंधति चौधरी का स्वर्ण पदक भी इस शानदार अभियान की बड़ी उपलब्धियों में शामिल माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके इंटरव्यू की खूब सराहना हो रही है। लोग उनकी सादगी, विनम्रता और देश के प्रति समर्पण की तारीफ करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। नोट: इस समाचार का आधार केवल साझा किए गए स्क्रीनशॉट में दिखाई दे रही जानकारी है, जिसमें अर्चंधति चौधरी को CWG स्वर्ण पदक विजेता के रूप में दिखाया गया है। स्क्रीनशॉट में उनके बयान का पूरा संदर्भ उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऊपर दिया गया विवरण उसी सीमित जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
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Trendingलखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को देश के सबसे आधुनिक और महंगे एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा था। करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से बने इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने किया था। उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग अमेरिका जैसे होंगे। हालांकि उद्घाटन के महज 18 दिन बाद ही एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर 84 स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की शिकायत सामने आई है। इनमें लखनऊ और कानपुर दोनों दिशाओं में कई हिस्सों पर तत्काल पैचवर्क और मरम्मत का काम शुरू करना पड़ा। लगातार हो रही मरम्मत ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना का निर्माण कार्य PNC Infratech को सौंपा गया था, जिसके मालिक प्रदीप जैन को भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का भाई बताया जा रहा है। इस कारण ठेका आवंटन को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि ठेका दिए जाने में किसी अनियमितता का आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। मामले के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित किया है। परियोजना से जुड़े कुछ अधिकारियों को हटाया गया है और मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली पर भी रोक लगाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही तकनीकी जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि सड़क धंसने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़क की नींव, मिट्टी के संपीड़न (Compaction) या जल निकासी व्यवस्था में मानकों का पालन नहीं किया गया हो, तो इस प्रकार का धंसाव संभव है। अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। इस घटना ने एक बार फिर देश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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