दिल्ली सरकार ने यमुना नदी की गहरी सफाई (डीप ड्रेजिंग) की संभावना पर अध्ययन करने की जिम्मेदारी IIT दिल्ली को सौंपी है। संस्थान यह जांच करेगा कि नदी के तल से वर्षों से जमा गाद और कचरा हटाना तकनीकी और पर्यावरणीय रूप से कितना संभव है।

डीप ड्रेजिंग का उद्देश्य यमुना की जल धारण क्षमता बढ़ाना, बरसात के दौरान बाढ़ का खतरा कम करना और राजधानी में पानी की उपलब्धता बेहतर बनाना है। IIT दिल्ली की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे इस परियोजना पर फैसला लिया जाएगा।

दिल्ली सरकार के अनुसार राजधानी में रोजाना करीब 1,290 मिलियन गैलन पानी की जरूरत होती है, जबकि उत्पादन लगभग 990–1,000 मिलियन गैलन प्रतिदिन है। यानी शहर में करीब 300 मिलियन गैलन पानी की कमी बनी हुई है। सरकार का मानना है कि यमुना की क्षमता बढ़ने से कच्चे पानी की उपलब्धता में सुधार हो सकता है।

इसी के साथ दिल्ली जल बोर्ड यमुना में गिरने वाले कई नालों की भी सफाई कर रहा है, ताकि नदी में प्रदूषण कम हो और उसकी स्थिति में सुधार लाया जा सके।